राष्ट्रनिर्माण में युवाओ के योगदान की जरुरत

युवा किसी भी देश का भविष्य है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ 65 % आबादी 35 वर्ष से कम है। तो आप समझ सकते है कि इस देश के लिये युवाओं का सही द...

The heroes of pokhran

                the heroes of pokhran


13 मई 1998 ये इतिहास के पन्नो में दर्ज वो तारीख है जिसने भारत को परमाणु शक्ति संम्पन देशों की कतार में ला कर खड़ा कर दिया। 90 के दशक में जब न्यूक्लियर अमेरिका , रूस और चीन जैसे परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों को दुनिया पर दबदबा था तो देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देश को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाने की ठानी और तैयार हुआ एक खुफिया ऑपरेशन जिसे नाम दिया गया शक्ति और इसको सफल बनाने का जिम्मा था DRDO के चीफ dr A P J अब्दुल कलाम का। 
उस समय की सरकार जानती थी के इस परीक्षण को करना और इसके बाद कि स्तिथि बहुत मुस्किलो से भरी होगी मगर जब मामला देश हित का हो तो हर मुश्किल से लड़ने के लिये तैयार रहना पड़ता है। 
मगर अपनी सूझबूझ से पोखरण की टीम ने अपने इस अभियान की भनक किसी को नही लगने दी यह तक कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को भी इसकी जरा भी खबर न लग पायी। यहाँ तक कि इस परीक्षण के बाद अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड शेल्बे ने भी अपने एक इंटरव्यू में मन था कि ये CIA की बहुत बड़ी विफलता थी कि वो इस परीक्षण की कोई जानकारी नही जुटा पायी।
और यही थी हमारे पोखरण के हीरो की सफलता जो इस मुश्किल अभियान को सफल बनाया।

आखिर कैसे भारतीय सेना, सरकार और DRDO के अधिकारियों ने दुनिया से इस अभियान को बचाया कैसे इतनी शक्तिशाली स्टेलिट्स से बचकर इस अभियान को सफल बनाया वो कहानी भी दिलचस्प है।
सैटेलाइट से बचने के लिये सारे काम रात को किये जाते और सुबह सब चीजों को वैसा ही कर दिया जाता जैसे वो पहले थे और कही रेत भी हटाई जाती तो उसे हवा के दिशा में ऐसे रखा जाता ताकि वो सब प्राकतिक लगे। जब अगले दिन खुफिया एजेंसियां सेटेलाइट की तस्वीर देखती तो उन्हें सब सामान्य दिखता।
यहाँ तक कि कम्युनिकेसन में भी सावधानी बरती जाती शाफ़्ट के नाम भी व्हीट हाउस, विस्की या ताजमहल आदि रखे गए।
DRDO और BARC के वैज्ञनिक भी जब साइट पर जाते तो वो आर्मी की वर्दी में जाते और उनके नाम भी बदले गए थे अब्दुल कलाम जी को मेजर जनरल पृथ्वी राज नाम दिया गया था।
अभियान की गोपनीयता को बनाये रखने के लिये और किसी जानकारी को लीक होने से बचाने के लिये अपने अधिकारियो को भी अंधेरे में रखा गया था यहाँ तक कि कलाम जी वाजपेयी जी और राजगोपालाचारी जी की न्यूक्लीय वपेन टेस्ट के संबंधित मीटिंग की जानकारी तत्कलीन रक्षामंत्री से भी छुपाई गयी।
यहाँ तक कि कहा जाता है कि CIA को भी इसकी जानकारी अटल बिहारी वाजपेयी जी के टेलिविजन पर घोषणा के बाद ही पता चली।
तो ऐसे थे हमारे पोखरण के हीरो।जिन्होंए राष्ट्र को शक्ति सम्पन्न बनाने के लिये इस खुफिया मिशन को अंजाम दिया।
यहाँ एक बात साफ करना जरूरी है कि न्यूक्लियर परीक्षण का मतलब सिर्फ परमाणु हथियार बनाना नही होता ये आत्मा रक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों के लिये भी जरूरी है। ताकि हमारे विकास को गति मिल सके। और भारत का तो इतिहास भी रहा है के हमने कभी किसी देश पर आक्रमण नही किया । हिंदुस्तान हमेशा से विश्व शांति के लिये ही काम कर रहा है।

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Yamaha FZ-S 34,000 Km Run in Good condition 2012 modal ask price 37,500/-

Yamaha FZ-S 34,000 Km Run in Good condition 2012 modal ask price 37,500/- ( negotiable )




Yamaha FZ-S has been launched keeping India’s young generation in mind. The FZ-S’ design elements are very stylish and dynamic and Yamaha markets it as ‘Lord of the Street’s.  The FZ-S is powered by a 153cc single-cylinder air-cooled engine that generates 14PS at 75000rpm and 13.6Nm of torque at 6000rpm. It is mated to a 5-speed manual gearbox with 1 down and 4 up shift pattern. The FZ-S sports a telescopic suspension at the front and monocross suspension at the front that provides 120mm of travel making a decent motorcycle for pot hole affected roads.  he motorcycle is equipped with disc brake at the front and drum at the rear. The FZ-S gets 17-inch wheels with 100/80 and 140/60 radial tyres at the front and rear respectively. The midship muffler looks very stylish that goes along the overall design of the motorcycle. 

         Mileage- 35-40

       Km Run- 34,000 KM

            160 CC

      Modal -    2012

     Condition -Good

         ask price 37,500/

      mail- contact@ankushchauhanblog.com

         location - Haridwar, Uttrakhand


  Other specification 
Front Brake TypeDisc
Rear Brake TypeDrum
Front Tyre Size100/80-17
Rear Tyre Size140/60-R17
Tyre TypeTubeless
Radial TyresYes
Wheel TypeAlloy
Fuel Tank Capacity12 litres
Reserve Fuel Capacity1.2 litres
contact -Narendra
Mobile  - 6396787400
Contact watsaap-8171003506

location -Haridwar, uttrakhand

ADVT.






Swami Vivekananda , An inspirational person for youth a Biography

Swami Vivekananda Biography
Swami Vivekananda (1863-1902) was born on January 12, 1863, on the occasion of Makar Sankranti. he was the foremost disciple of Sri Ramakrishna and a world spokesperson for Vedanta. 
Swami Vivekananda was a Hindu monk and one of the most celebrated spiritual leaders of India. He was more than just a spiritual mind; he was a prolific thinker, great orator and passionate patriot. He carried on the free-thinking philosophy of his guru, Ramakrishna Paramhansa forward into a new paradigm. He worked tirelessly towards betterment of the society .
 he was Born as  Narendranath Dutta, into an affluent Bengali family in Calcutta, Vivekananda was one of the eight children of Vishwanath Dutta and Bhuvaneshwari Devi. 



He felt it was best to teach universal principles rather than personalities, to satisfy his intellectual quest for God, Narendranath visited prominent spiritual leaders from all religions, asking them a single question, “Have you seen God?” Each time he came away without a satisfying answer. He put forward the same question to Sri Ramkrishna at his residence in Dakshinewar Kali Temple compounds. Without a moment's hesitation, Sri Ramakrishna replied: "Yes, I have. I see God as clearly as I see you, only in a much deeper sense." Vivekananda, initially unimpressed by the simplicity of Ramkrishna, was astonished with Ramakrishna's reply. Ramakrishna gradually won over this argumentative young man with his patience and love. The more Narendranath visited Dakshineshwar, the more his questions were answered.

Swami Vivekananda represented Hinduism at the first World Parliament of Religions in Chicago in 1893 where he was an instant success. Subsequently he was invited to speak all over America and Europe. He was a man with a great spiritual presence and tremendous intellect.Most of the Vedanta Societies which were founded in America and Europe up through the 1930s can trace their origins directly to Vivekananda or the people who heard him speak from 1893 through 1900.
Quotes from Swami Vivekananda
Arise,awake and do not stop until the goal is reached.
“Religion is not in books, nor in theories, nor in dogmas, nor in talking, not even in reasoning. It is being and becoming.”
“You have to grow from the inside out. None can teach you, none can make you spiritual. There is no other teacher but your own soul.”

“Condemn none: if you can stretch out a helping hand, do so. If you cannot, fold your hands, bless your brothers, and let them go their own way.”

“Be an atheist if you want, but do not believe in anything unquestioningly.”
“In judging others we always judge them by our own ideals. That is not as it should be. Everyone must be judged according to his own ideal, and not by that of anyone else.”
“He who has no faith in himself can never have faith in God.”
“The first sign that you are becoming religious is that you are becoming cheerful. When a man is gloomy, that may be dyspepsia, but it is not religion.”
“The living God is within you.”
“All the powers in the universe are already ours. It is we who have put our hands before our eyes and cry that it is dark.”

“Where can we go to find God if we cannot see Him in our own hearts and in every living being.
“Manifest the divinity within you and everything will be harmoniously arranged around it.”
“He alone is worshiping God who serves all beings.”
“We are what our thoughts have made us; so take care about what you think. Words are secondary. Thoughts live; they travel far.”

“The world is the great gymnasium where we come to make ourselves strong.”


When an idea exclusively occupies the mind, it is transformed into an actual physical or mental state


Swami Vivekanand Books in English: Bhaakti Yoga + Karma Yog + Raj Yoga + Jnana Yoga (Gyan Yoga) + Meditation and it method

                   

ABY, ayushman bharat scheme, आयुष्मान भारत योजना

आयुष्मान भारत योजना (ABY) , या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना

आयुष्मान भारत योजना (ABY) , या प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जिसे मोदी केयेर भी कहाँ जा रहा है भारत सरकार द्वारा शुरू की गयी एक हेल्थ इंश्योरेंस स्कीम है PM JAY के तहत 10 करोड़ परिवारों को 5 लाख का सालाना कवर दिया जायेगा। यह योजना देश के गरीबो और वंचितों को ध्यान मे रखकर बनायी गयी एक योजना है जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 25 सितम्बर को पूरे देश मे लागू कर दि गयी है। इस योजना के तहत आने वाले परिवारों को 5 लाख तक का कवर मुफ्त दिया जायेगा यानी की उनका इलाज मुफ्त किया जायेगा इसमे ज्यादातर बीमारियां कवर की गयी है। ये योजना देश के गरीबो के लिय एक वरदान है। इसके तहत देश के 10 करोड़ परिवार यानी लगभग 50 करोड़ लोग आएंगे। राज्य मे राष्ट्रीय स्वस्थ बीमा योजना मे शामिल लोग स्वतः ही इस योजना मे शामिल हो जयेगे।
आयुष्मान भारत के लाभार्थी को ना तो एडमिट होने के लिय ना ही इलाज के के लिय किसी भी प्रकार का कोई खर्च देना है। सारा खर्च सरकार उठायेगी ये एक प्रकार की कैश लेस योजना है। साथ ही अस्पताल मे एक हेल्प डेस्क होगी जो आपकी सहायता करेगी । इसके तहत सभी सरकारी और चुनिंदा निजी अस्पताल शामिल होंगे जो मुफ्त इलाज प्रदान करेगे। इसमे बायपास, घुटना बदलना या स्टेट डालना आदि सभी इलाज कवर किये गये है। इस योजना के तहत सरकार 5000 करोड़ खर्च करने जा रही है। इसके लिय सरकार पात्र परिवरों की एक सूची बाना रही है जिसके बाद सभी को एक नंबर दिया जायेगा। जिसके माद्यम से इलाज की सुविधा उन्हें उपलब्ध करायी जायेगी। इस योजना मे अब तक 20 राज्यो से केंद्र के साथ मिलकर काम करने पर हामी भारी है उन र्जयो मे ये योजना लागू हो गयी है। इस योजना को अमेरिका मे बराक ओबामा द्वारा लायी गयी स्वस्थ योजना के तरह देखा जा रहा है इसलिये लोग इसे ओबामा केयेर की तर्ज पर मोदी केयेर भी कह रहे है। मगर एक बात गौर करने वाली ये है भारत सरकार द्वारा लायी गयी ये योजना विश्व की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना है जो की 50 करोड़ लोगों को कवर करेगी। इस योजना की जानकारी ज्यादा से ज्यादा शेयर करे ताकि पात्र लोग इसका लाभ उठा सके।

मा0 प्रधानमंत्री जी द्वारा प्रारम्भ की गयी "आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना" जिसके अन्तर्गत उत्तराखंड प्रदेश के लगभग 5 लाख परिवारों को गम्भीर बीमारी के ईलाज हेतु प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये तक की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है। मा0 प्रधानमंत्री जी की योजना को और आगे बढाते हुये प्रदेश सरकार द्वारा "अटल आयुष्मान  उत्तराखण्ड योजना"  प्रारम्भ करते हुये लगभग 18 लाख और परिवारों को भी प्रतिवर्ष 5 लाख रूपये की निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी। इस प्रकार उत्तराखण्ड राज्य के समस्त 23 लाख परिवारों को सामान्य एवं गम्भीर बीमारी के ईलाज हेतु निःशुल्क चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो सकेगी।

यह सुविधा राज्य के सरकारी चिकित्सालयों (जिसमें समस्त सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला चिकित्सालय, संयुक्त चिकित्सालय एवं बेस चिकित्सालय सम्मिलित है) एवं सूचीब़द्ध निजी चिकित्सालयों में (रैफर करने के आधार पर) प्रदान की जायेगी। इमरजेन्सी में सूचीबद्ध निजी चिकित्सालयों में बिना रैफर किये भी उपचार कराया जा सकता है। यह योजना पूर्णतः कैशलैस एवं पेपरलैस है।
इसके लिए उत्तराखंड के नागरिक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते है 

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कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या?

कर्नाटक में बना राजनेतिक संकट और सत्ता की लड़ाई और खीच तान कोई नई बात तो नही है मगर क्या सत्ता के लिये सवैधानिक पदों का दुरुपयोग और धन बल खरीद फ़रोख क्या ये लोकतंत्र के लिये सही है।क्या ये जो कर रहे है वो राष्ट्रहित में है ये मारामारी जनता की सेवा के लिये तो नही ये तो सिर्फ सत्ता सुख के लिये है। मगर लोकतंत्र का ये रूप लूटतंत्र ज्यादा दिखयी देता है। मगर इसके लिये क्या सिर्फ बीजेपी दोषी है नही इस घटिया राजनीति की नींव कांग्रेस ने ही रखी थी और और इसकी शुरुआत तो आज़ादी के बाद बनी पहली नेहरू सरकार से ही शुरू हो चुकी थी।
 
कांग्रेस ने गवर्नर के ऑफिस का इस्तेमाल करते हुए विरोधी सरकारों को बर्खास्त करने और विपक्षी दलों को सरकार बनाने से रोकने के कई कुकर्म किए हैं. 
1952 में पहले आम चुनाव के बाद ही राज्यपाल के पद का दुरुपयोग शुरू हो गया. मद्रास (अब तमिलनाडु) में अधिक विधायकों वाले संयुक्त मोर्चे के बजाय कम विधायकों वाली कांग्रेस के नेता सी. राजगोपालाचारी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया जो उस समय विधायक नहीं थे.
भारत में पहली बार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ईएमएस नम्बूदरीपाद के नेतृत्व में साल 1957 में चुनी गई. लेकिन राज्य में कथित मुक्ति संग्राम के बहाने तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 1959 में इसे बर्खास्त कर दिया
1980 में इंदिरा गांधी ने जनता सरकारों को बर्खास्त कर दिया. गवर्नरों के माध्यम से अपनी पसंद की सरकार बनवाने का प्रयास केंद्र सरकारें करती रही हैं. संविधान के अनुच्छेद 356 का खुलकर दुरुपयोग किया जाता है.
सन 1992 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव राव ने बीजेपी शासित चार राज्यों में सरकारें बर्खास्त कर दी थीं.
कर्नाटक में 1983 में पहली बार जनता पार्टी की सरकार बनी थी. रामकृष्ण हेगड़े जनता पार्टी की सरकार में पहले सीएम थे. इसके बाद अगस्त, 1988 में एसआर बोम्मई कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने. राज्य के तत्कालीन राज्यपाल पी वेंकटसुबैया ने 21 अप्रैल, 1989 को बोम्मई सरकार को बर्खास्त कर दिया. सुबैया ने कहा कि बोम्मई सरकार विधानसभा में अपना बहुमत खो चुकी है. बोम्मई ने विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से समय मांगा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. बोम्मई ने राज्यपाल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. फैसला बोम्मई के पक्ष में आया
वर्ष 1979 में हरियाणा में देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल की सरकार बनी. 1982 में भजनलाल ने देवीलाल के कई विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया. हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल जीडी तवासे ने भजनलाल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. राज्यपाल के इस फैसले से नाराज चौधरी देवीलाल ने राजभवन पहुंच कर अपना विरोध जताया था. अपने पक्ष के विधायकों को देवीलाल अपने साथ दिल्ली के एक होटल में ले आए थे, लेकिन ये विधायक यहां से निकलने में कामयाब रहे और भजनलाल ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया.
ये कुछ उदहारण है समझने के लिये के राजनीति के इस हमाम में सब नंगे है।
राजनीति का ये निचला सत्तर कोई नया नही है । मगर ये देश के लिये अच्छा नही है। क्योकि राजनीति में सत्ता का ये दुरुपयोग कब तानशाही बन जाये कहा नही जा सकता राजनीति की ये सोच ही इमरजेंसी के हालात पैदा करती है । 
मगर क्या है समाधान इस गिरते राजनीतिक स्तर का। क्या जनता के पास कोई अधिकार है या वो सिर्फ वोटबैंक ही है । क्या यही लोकतंत्र है?


आंदोलन या राजनितिक षड्यंत्र


यू तो भारत का इतिहास आंदोलनों से भरा हुआ है। देश को आज़ादी और सैकड़ो रियासतों का एक होकर एक राष्ट्र का निर्माण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का ही परिणाम है। 1857 में  प्रथम स्वन्त्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक दर्जनों आंदोलन जिन्होंए इस राष्ट्र को एक रूप देने में भूमिका निभायी।
और आज़ादी के बाद भी देश मे आज अनेको संगठन और आंदोलन खड़े रहते है। आये दिन देश मे कही ना कही नए संगठन और आंदोलन की खबर मिलती रहती है। 
मगर क्या आज के आंदोलन राष्ट्रहित में लगते है या ये सिर्फ कुछ लोगो की निजी महत्वकांशाओ की पूर्ति के लिये आयोजित होते है। इन आंदोलनों का परिणाम देखकर तो ऐसा ही लगता है। जहाँ जे पी के आंदोलन ने कई छोटी छोटी पार्टीयो को जन्म दिया वही हाल ही के अन्ना आंदोलन ने भी एक नई पार्टी को जन्म दिया। यही नही छोटे छोटे जातिय  आंदोलन भी ऐसे ही प्रतीत होते है चाहे वो  पाटीदार  आंदोलन, गुज़ज़र आंदोलन, जाट आंदोलन, करनी का आंदोलन, दलित आन्दोलन, या किसान आंदोलन, दक्षिण भारत का भाषा आंदोलन । सभी किसी न किसी की राजनीतिक महत्वकांशाओ की पूर्ति के लिये खड़े हुए ही प्रतीत होते है।और ज्यादातर चुनावों के समय किसी को फायदा या नुकसान पहुचने के लिये खड़े होते है और फिर कही गयाब से हो जाते है। ये सब एक राजनीतिक चक्र सा ही प्रतीत होता है।
हमारी मीडिया चाहे वो सोशल मीडिया हो या मेन स्ट्रीम कही न कही टी आर पी या अपने राजनीतिक आकाओ के इशारे पर  इन आन्दोलओ को हवा देते रहते है।
इन आन्दोलनों में कही पटरियां उखड़ी जाती है कही बसे जलायी जाती है। आन्दोलन के नाम पर पूरा उपद्रव मचाया जाता है। 
क्या यही आंदोलन है आज़ादी के 200 साल के संघर्ष में शायद ही कभी देश की संम्पति को इतना नुकसान पहुँचाया गया हो तब तो हम पर शासन भी विदेश का था तब भी आन्दोलन की मर्यादा थी मगर आज अपनी ही सरकारों के विरुद्ध आंदोलनों में कोई मर्यादा नही रखी जाती।
साथ ही ये जातिय आंदोलन किसी को इंसाफ दिलाने के बाजए देश को खंडित करते प्रतीत होते है। देश मे जातिय संघर्ष को बढ़ावा देते है।
जातिय  एकता के नाम पर राष्ट्रीय एकता को खंडित किया जाता है खुद सोचिये ये कहा तक जायज है।
क्या हम निजी स्वार्थ और राजनीतिक हथकंडों से दूर रहकर राष्ट्रहित में कार्ये नही कर सकते।
राजनीति का भी इतना निचला स्तर देश के लिये खतरनाक है । अपना वोटबैंक बनाने और 2-4 सीट के लिये नेता देश को तोड़ने से भी नही चूकते, ये बड़े शर्म की बात है। जाति धर्म मे देश को बाट कर अगर जीत भी लिए तो ऐसे बिखरे देश को कब तक सुरक्षित रख पाओगे।
आज देश के हर जिम्मेदार नागरिक को सोचने की जरूरत है के हम समाज को किस दिशा में ले जा रहे है और हम अपनी आने वाली पीढ़ी को कैसा देश देना चाहते है। ऐसे कई देश है जो आज गृहयुद्ध की स्तिथि में है क्या हम अपने देश को भी ऐसा  ही बनना चाहते है। 
अगर हम उस भयावह स्तिथि से देश को बचाना चाहते है तो राजनीतिक कठपुतली और एक वोटबैंक बनने से बचना होगा। राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाये रखना होगा। राजनीतिक फायदों के लिये खड़े इन आंदोलनों से भी बचना होगा। अफवाओं से बचकर रहना होगा। तभी हम अपने देश को सुरक्षित रख पाएंगे।
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राष्ट्रहित सर्वोपरि।

राष्ट्रहित सर्वोपरि।

किसी भी देश की तरक्की इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ की सरकार और जनता राष्ट्रहित में क्या कार्ये कर रही है।
यदि किसी देश की सरकार या जनता राष्ट्रहित को ध्यान ना रखकर निजी स्वार्थ या लाभ के लिये राष्ट्रहित से समझौता करती है तो उस देश को खतरे में समझना चाहिये।
आज के समय मे ये अक्सर देखने को मिलने लगा है के राजनीतिक दल और कुछ लोग अपने निजी क्षणिक लाभ के लिये देश की एकता अखंडता से भी खिलवाड़ करने से नही बचते। देश को जातियो और धर्म मे बाट कर ये अपने निजी स्वार्थ को सिद्ध करना चाहते है। अपने विपक्षी और किसी विचारधारा का विरोध करने के लिये ये देश का विरोध करने से भी नही चूकते। आप खुद ही सोचिये अगर ये देश ही सुरक्षित नही होगा तो आप कैसे सुरक्षित रह सकते है। अगर देश को कमजोर किया तो हम भी कभी मजबूत नही हो सकते एक कमजोर देश को गुलाम होने से कोई नही रोक सकता। इसलिये अगर आप खुद को सुरक्षित करना चाहते है तो राष्ट्रहित को ऊपर रखिये राष्ट्र को मजबूत करिए। 
अगर कोई सरकार या व्यक्ति राष्ट्रहित में कार्ये करता है तो उसमें साथ खड़े रहिये अगर साथ भी न दे सको तो कम से कम विरोध मत कीजिये। राष्ट्रहित से कभी समझौता मत कीजिये।
 राष्ट्रहित के लिये राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करे। हमे एक साथ मिलकर राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिये । और हम जिस भी स्तर पर हो जिस भी स्तिथि में हो अपना सहयोग सुनिश्चित करना चाहिये।

आप देश के लिये जो अच्छा कर सकते है अपने स्तर से करने का प्रयास करे और ऐसे लोगो को सहयोग करे जो राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका निभा रहे है। अगर हम अपने कार्ये को पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करे तो ये भी अपने आप मे बहुत बड़ा योगदान होगा। किसी भी राष्ट्रहित के कार्ये को राजनीति के चश्मे से ना देखे। आप किसी भी विचारधारा , पंथ, सम्प्रदाय के हो  राष्ट्र के विषय मे अपने बीच किसी भी मतभेद को ना आने दे।
इसी में राष्ट्र और हम सबका हित है। राष्ट्रहित से बढ़ कर कुछ नही राष्ट्रहित सर्वोपरि रहना चाहिए।
हमे अपनी जिम्मेदारी जैसे देश को स्वच्छ रखना, ईमानदार नागरिक बनना, न रिश्वत लेने और न ही देना, भ्रस्टाचार का साथ ना देना, सही वोट डालना, सामाजिक सहयोग को बढ़ाना, राष्ट्रहित में कार्ये करना आदि को समझना चाहिए। अच्छा नागरिक वही है जो स्वयं जिम्मेदार बने और दूसरों को भी प्रेरित करे। युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी शक्ति है। अगर युवा अपनी जिम्मेदारी समझेगे तो देश को आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता।
अगर आज हम कहते है कि अमेरिका महाशक्ति है वहाँ के नागरिक समृद्ध है तो उसका कारण है वहाँ के लोगो का अमेरिका के प्रति प्रेम राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना जिसे वो कहते है अमेरिका फर्स्ट।
अगर हम स्वयं से पहले राष्ट्र को रखेगे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेगे तो भारत को भी महाशक्ति बनने और यहाँ की जनता को खुशहाल बनने से कोई नही रोक सकता।
इसलिय  हमे जाति, धर्म, सम्प्रदाय , राजनीतिक मतभेद और निजी महत्वकांशाओ से ऊपर उठकर देश का सोचना होगा और  राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।
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