राष्ट्रनिर्माण में युवाओ के योगदान की जरुरत

युवा किसी भी देश का भविष्य है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ 65 % आबादी 35 वर्ष से कम है। तो आप समझ सकते है कि इस देश के लिये युवाओं का सही दि...

कर्नाटक में लोकतंत्र की हत्या?

कर्नाटक में बना राजनेतिक संकट और सत्ता की लड़ाई और खीच तान कोई नई बात तो नही है मगर क्या सत्ता के लिये सवैधानिक पदों का दुरुपयोग और धन बल खरीद फ़रोख क्या ये लोकतंत्र के लिये सही है।क्या ये जो कर रहे है वो राष्ट्रहित में है ये मारामारी जनता की सेवा के लिये तो नही ये तो सिर्फ सत्ता सुख के लिये है। मगर लोकतंत्र का ये रूप लूटतंत्र ज्यादा दिखयी देता है। मगर इसके लिये क्या सिर्फ बीजेपी दोषी है नही इस घटिया राजनीति की नींव कांग्रेस ने ही रखी थी और और इसकी शुरुआत तो आज़ादी के बाद बनी पहली नेहरू सरकार से ही शुरू हो चुकी थी।
 
कांग्रेस ने गवर्नर के ऑफिस का इस्तेमाल करते हुए विरोधी सरकारों को बर्खास्त करने और विपक्षी दलों को सरकार बनाने से रोकने के कई कुकर्म किए हैं. 
1952 में पहले आम चुनाव के बाद ही राज्यपाल के पद का दुरुपयोग शुरू हो गया. मद्रास (अब तमिलनाडु) में अधिक विधायकों वाले संयुक्त मोर्चे के बजाय कम विधायकों वाली कांग्रेस के नेता सी. राजगोपालाचारी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया जो उस समय विधायक नहीं थे.
भारत में पहली बार कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार ईएमएस नम्बूदरीपाद के नेतृत्व में साल 1957 में चुनी गई. लेकिन राज्य में कथित मुक्ति संग्राम के बहाने तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 1959 में इसे बर्खास्त कर दिया
1980 में इंदिरा गांधी ने जनता सरकारों को बर्खास्त कर दिया. गवर्नरों के माध्यम से अपनी पसंद की सरकार बनवाने का प्रयास केंद्र सरकारें करती रही हैं. संविधान के अनुच्छेद 356 का खुलकर दुरुपयोग किया जाता है.
सन 1992 में प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हाराव राव ने बीजेपी शासित चार राज्यों में सरकारें बर्खास्त कर दी थीं.
कर्नाटक में 1983 में पहली बार जनता पार्टी की सरकार बनी थी. रामकृष्ण हेगड़े जनता पार्टी की सरकार में पहले सीएम थे. इसके बाद अगस्त, 1988 में एसआर बोम्मई कर्नाटक के मुख्यमंत्री बने. राज्य के तत्कालीन राज्यपाल पी वेंकटसुबैया ने 21 अप्रैल, 1989 को बोम्मई सरकार को बर्खास्त कर दिया. सुबैया ने कहा कि बोम्मई सरकार विधानसभा में अपना बहुमत खो चुकी है. बोम्मई ने विधानसभा में बहुमत साबित करने के लिए राज्यपाल से समय मांगा, लेकिन उन्होंने इनकार कर दिया. बोम्मई ने राज्यपाल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी. फैसला बोम्मई के पक्ष में आया
वर्ष 1979 में हरियाणा में देवीलाल के नेतृत्व में लोकदल की सरकार बनी. 1982 में भजनलाल ने देवीलाल के कई विधायकों को अपने पक्ष में कर लिया. हरियाणा के तत्कालीन राज्यपाल जीडी तवासे ने भजनलाल को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया. राज्यपाल के इस फैसले से नाराज चौधरी देवीलाल ने राजभवन पहुंच कर अपना विरोध जताया था. अपने पक्ष के विधायकों को देवीलाल अपने साथ दिल्ली के एक होटल में ले आए थे, लेकिन ये विधायक यहां से निकलने में कामयाब रहे और भजनलाल ने विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर दिया.
ये कुछ उदहारण है समझने के लिये के राजनीति के इस हमाम में सब नंगे है।
राजनीति का ये निचला सत्तर कोई नया नही है । मगर ये देश के लिये अच्छा नही है। क्योकि राजनीति में सत्ता का ये दुरुपयोग कब तानशाही बन जाये कहा नही जा सकता राजनीति की ये सोच ही इमरजेंसी के हालात पैदा करती है । 
मगर क्या है समाधान इस गिरते राजनीतिक स्तर का। क्या जनता के पास कोई अधिकार है या वो सिर्फ वोटबैंक ही है । क्या यही लोकतंत्र है?

आंदोलन या राजनितिक षड्यंत्र


यू तो भारत का इतिहास आंदोलनों से भरा हुआ है। देश को आज़ादी और सैकड़ो रियासतों का एक होकर एक राष्ट्र का निर्माण भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का ही परिणाम है। 1857 में  प्रथम स्वन्त्रता संग्राम से लेकर 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन तक दर्जनों आंदोलन जिन्होंए इस राष्ट्र को एक रूप देने में भूमिका निभायी।
और आज़ादी के बाद भी देश मे आज अनेको संगठन और आंदोलन खड़े रहते है। आये दिन देश मे कही ना कही नए संगठन और आंदोलन की खबर मिलती रहती है। 
मगर क्या आज के आंदोलन राष्ट्रहित में लगते है या ये सिर्फ कुछ लोगो की निजी महत्वकांशाओ की पूर्ति के लिये आयोजित होते है। इन आंदोलनों का परिणाम देखकर तो ऐसा ही लगता है। जहाँ जे पी के आंदोलन ने कई छोटी छोटी पार्टीयो को जन्म दिया वही हाल ही के अन्ना आंदोलन ने भी एक नई पार्टी को जन्म दिया। यही नही छोटे छोटे जातिय  आंदोलन भी ऐसे ही प्रतीत होते है चाहे वो  पाटीदार  आंदोलन, गुज़ज़र आंदोलन, जाट आंदोलन, करनी का आंदोलन, दलित आन्दोलन, या किसान आंदोलन, दक्षिण भारत का भाषा आंदोलन । सभी किसी न किसी की राजनीतिक महत्वकांशाओ की पूर्ति के लिये खड़े हुए ही प्रतीत होते है।और ज्यादातर चुनावों के समय किसी को फायदा या नुकसान पहुचने के लिये खड़े होते है और फिर कही गयाब से हो जाते है। ये सब एक राजनीतिक चक्र सा ही प्रतीत होता है।
हमारी मीडिया चाहे वो सोशल मीडिया हो या मेन स्ट्रीम कही न कही टी आर पी या अपने राजनीतिक आकाओ के इशारे पर  इन आन्दोलओ को हवा देते रहते है।
इन आन्दोलनों में कही पटरियां उखड़ी जाती है कही बसे जलायी जाती है। आन्दोलन के नाम पर पूरा उपद्रव मचाया जाता है। 
क्या यही आंदोलन है आज़ादी के 200 साल के संघर्ष में शायद ही कभी देश की संम्पति को इतना नुकसान पहुँचाया गया हो तब तो हम पर शासन भी विदेश का था तब भी आन्दोलन की मर्यादा थी मगर आज अपनी ही सरकारों के विरुद्ध आंदोलनों में कोई मर्यादा नही रखी जाती।
साथ ही ये जातिय आंदोलन किसी को इंसाफ दिलाने के बाजए देश को खंडित करते प्रतीत होते है। देश मे जातिय संघर्ष को बढ़ावा देते है।
जातिय  एकता के नाम पर राष्ट्रीय एकता को खंडित किया जाता है खुद सोचिये ये कहा तक जायज है।
क्या हम निजी स्वार्थ और राजनीतिक हथकंडों से दूर रहकर राष्ट्रहित में कार्ये नही कर सकते।
राजनीति का भी इतना निचला स्तर देश के लिये खतरनाक है । अपना वोटबैंक बनाने और 2-4 सीट के लिये नेता देश को तोड़ने से भी नही चूकते, ये बड़े शर्म की बात है। जाति धर्म मे देश को बाट कर अगर जीत भी लिए तो ऐसे बिखरे देश को कब तक सुरक्षित रख पाओगे।
आज देश के हर जिम्मेदार नागरिक को सोचने की जरूरत है के हम समाज को किस दिशा में ले जा रहे है और हम अपनी आने वाली पीढ़ी को कैसा देश देना चाहते है। ऐसे कई देश है जो आज गृहयुद्ध की स्तिथि में है क्या हम अपने देश को भी ऐसा  ही बनना चाहते है। 
अगर हम उस भयावह स्तिथि से देश को बचाना चाहते है तो राजनीतिक कठपुतली और एक वोटबैंक बनने से बचना होगा। राष्ट्र की एकता और अखंडता को बनाये रखना होगा। राजनीतिक फायदों के लिये खड़े इन आंदोलनों से भी बचना होगा। अफवाओं से बचकर रहना होगा। तभी हम अपने देश को सुरक्षित रख पाएंगे।

राष्ट्रहित सर्वोपरि।

राष्ट्रहित सर्वोपरि।

किसी भी देश की तरक्की इस बात पर निर्भर करती है कि वहाँ की सरकार और जनता राष्ट्रहित में क्या कार्ये कर रही है।
यदि किसी देश की सरकार या जनता राष्ट्रहित को ध्यान ना रखकर निजी स्वार्थ या लाभ के लिये राष्ट्रहित से समझौता करती है तो उस देश को खतरे में समझना चाहिये।
आज के समय मे ये अक्सर देखने को मिलने लगा है के राजनीतिक दल और कुछ लोग अपने निजी क्षणिक लाभ के लिये देश की एकता अखंडता से भी खिलवाड़ करने से नही बचते। देश को जातियो और धर्म मे बाट कर ये अपने निजी स्वार्थ को सिद्ध करना चाहते है। अपने विपक्षी और किसी विचारधारा का विरोध करने के लिये ये देश का विरोध करने से भी नही चूकते। आप खुद ही सोचिये अगर ये देश ही सुरक्षित नही होगा तो आप कैसे सुरक्षित रह सकते है। अगर देश को कमजोर किया तो हम भी कभी मजबूत नही हो सकते एक कमजोर देश को गुलाम होने से कोई नही रोक सकता। इसलिये अगर आप खुद को सुरक्षित करना चाहते है तो राष्ट्रहित को ऊपर रखिये राष्ट्र को मजबूत करिए। 
अगर कोई सरकार या व्यक्ति राष्ट्रहित में कार्ये करता है तो उसमें साथ खड़े रहिये अगर साथ भी न दे सको तो कम से कम विरोध मत कीजिये। राष्ट्रहित से कभी समझौता मत कीजिये।
 राष्ट्रहित के लिये राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका सुनिश्चित करे। हमे एक साथ मिलकर राष्ट्र से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करनी चाहिये । और हम जिस भी स्तर पर हो जिस भी स्तिथि में हो अपना सहयोग सुनिश्चित करना चाहिये।

आप देश के लिये जो अच्छा कर सकते है अपने स्तर से करने का प्रयास करे और ऐसे लोगो को सहयोग करे जो राष्ट्रनिर्माण में अपनी भूमिका निभा रहे है। अगर हम अपने कार्ये को पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करे तो ये भी अपने आप मे बहुत बड़ा योगदान होगा। किसी भी राष्ट्रहित के कार्ये को राजनीति के चश्मे से ना देखे। आप किसी भी विचारधारा , पंथ, सम्प्रदाय के हो  राष्ट्र के विषय मे अपने बीच किसी भी मतभेद को ना आने दे।
इसी में राष्ट्र और हम सबका हित है। राष्ट्रहित से बढ़ कर कुछ नही राष्ट्रहित सर्वोपरि रहना चाहिए।
हमे अपनी जिम्मेदारी जैसे देश को स्वच्छ रखना, ईमानदार नागरिक बनना, न रिश्वत लेने और न ही देना, भ्रस्टाचार का साथ ना देना, सही वोट डालना, सामाजिक सहयोग को बढ़ाना, राष्ट्रहित में कार्ये करना आदि को समझना चाहिए। अच्छा नागरिक वही है जो स्वयं जिम्मेदार बने और दूसरों को भी प्रेरित करे। युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी शक्ति है। अगर युवा अपनी जिम्मेदारी समझेगे तो देश को आगे बढ़ने से कोई नही रोक सकता।
अगर आज हम कहते है कि अमेरिका महाशक्ति है वहाँ के नागरिक समृद्ध है तो उसका कारण है वहाँ के लोगो का अमेरिका के प्रति प्रेम राष्ट्रहित सर्वोपरि की भावना जिसे वो कहते है अमेरिका फर्स्ट।
अगर हम स्वयं से पहले राष्ट्र को रखेगे राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखेगे तो भारत को भी महाशक्ति बनने और यहाँ की जनता को खुशहाल बनने से कोई नही रोक सकता।
इसलिय  हमे जाति, धर्म, सम्प्रदाय , राजनीतिक मतभेद और निजी महत्वकांशाओ से ऊपर उठकर देश का सोचना होगा और  राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना होगा।

National health policy scheme , modicare

National health policy scheme , modicare
एक आम आदमी के जीवन मे सबसे बड़ी समस्या है बीमारियों पर होने वाला खर्च जससे देश का हर इंसान परेशान है और एक गरीब इंसान के लिये तो आज के महंगे इलाज के दौर में बहुत ज्यादा मुसीबत है कभी कभी लोगो के घर तक बिक जाते है इस समस्या के समाधान के लिये भारत सरकार देश की गरीब जनता के लिये एक योजना लेकर आई है।
भारत सरकार ने 2018 का बजट संसद में पेश किया वित्तमंत्री ने आयुष्मान भारत के अंतर्गत National health policy scheme (NHPS) की घोषणा की जो शायद हेल्थ सेक्टर की  आज तक सबसे बड़ी और महत्वकांक्षी योजना है। जिसका सीधे सीधे 10 करोड़ परिवारों या कहे के लगभग 50 करोड़ लोगों को फायदा मिल सकता है। जिसमे प्रतिवर्ष सरकार का लगभग 1100 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। 
National health policy scheme (NHPS) विश्व की सबसे बड़ी योजना होगी  अभी तक सरकार राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत गरीब परिवारों को 30000  का इसयोरांस देती थीं ।
लेकिन इस नई स्कीम के तहत एक वयक्ति को 5 लाख का कवर दिया जाएगा। यह योजना एक तरह का इंसोरेंस होगी यानी योजना का लाभ उठाने वाले लोगो का इन्श्योरेंस किया जायेगा और उनका कैश लेस इलाज होगा। इसके लिये चुनिंदा अस्पतालों में लोग कैश लेस इलाज करवा सकेंगे।
यह योजना आने वाले वित्तीय वर्ष यानी 1 अप्रैल 2018 से लागू हो जाएगी। जिसके तहत गरीब परिवार के लोगो का 5 लाख तक का इलाज का खर्च भारत सरकार उठाएगी।
इस योजना के तहत इलाज सिर्फ सरकारी अस्पतालों तक ही सीमित नही रहेगा बल्कि सरकार इसमें प्राइवेट अस्पतालों को भी जोड़ रही है ताकि मरीज को ज्यादा अच्छी सुविधा और लाभ मिल सके।

इस तरह की एक योजना अमेरिका में बराक ओबामा ने शुरू की थी जिसका नाम ओबामा केअर रखा गया था उसी तर्ज पर लोग अब इसे modicare भी कह रहे है। 

साथ ही भारत सरकार देशभर में 1.5लाख से ज्यादा हेल्थ और वेलनेस सेंटर खोलने की योजना भी है जहाँ जरूरी दावा और जाँच की सुविधाएं मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। सरकार इन केंद्रों को चलाने के लिये कॉरपोरेट का भी सहयोग लेने का प्रयास कर रही है।
इसके अतिरिक्त देश मे सरकार बच्चो के टीकाकरण के लिये मिशन इन्द्रधनुष और सस्ती कीमत पर दवाई उपलब्ध कराने के लिये प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना भी देश मे चलती है ये योजनाये देश मे पहले से चल रही है।
अगर ये सब योजनाये (health policy) आने वाले समय मे अच्छे से लागू होकर सही से चले तो गरीब इंसान के लिये बहुत बड़ी राहत की बात होगी।
National health policy scheme , modicare

Sukanya Samriddhi Yojana बेटी का सुरक्षित भविष्य और Income tax छूट

अगर आपके बेटी है तो आप Sukanya Samriddhi Yojana के तहत निवेश कर उसका भविष्य सुरक्षित करने के साथ अपने Income tax में भी 80C के तहत छूट पा सकते है।
हम जानते ही है हमारे देश मे बेटियों की स्तिथि बहुत अच्छी नही है सरकार ने हमारे देश में बेटियों के हालात में सुधार लाने के लिए Sukanya Samriddhi Yojana को प्रस्तुत किया था जो देश मे चलने वाले बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का ही एक भाग है| Sukanya Samriddhi  Scheme Details में जानकारी आप इस artical के माध्य्म से प्राप्त कर सकते है।
Sukanya Samriddhi Yojana Details In Hindi (सुकन्या योजना )
Sukanya Samriddhi Yojana को भारत सरकार  ने 21st जनवरी 2015 को launch किया था। इस योजना का मुख्य उद्देश्य Beti Bachao Beti Padhao campaign के अंतर्गत बेटियो को ऊंची पढ़ाई के लिए और शादी के बड़े खर्चो के लिए धन जोड़ने में मदद करना  है इसके  लिये  सरकार ने यह स्कीम लॉन्च की थी|
Sukanya Samriddhi Yojana Feature 
1. Sukanya Samriddhi Yojana  के तहत सिर्फ बेटियो के मातापिता ही अपनी बेटियों का खाता खुलवा सकते है |
2. जिसके अंतर्गत आप अधिकतम 2 बेटियों का खाता खुला सकते है।
3. सुकन्या समृद्धि योजना के लिये आपको पोस्ट आफिस या बैंक में खाता खुलवाना होता है।
4. आपकी बेटी के 14 साल की उम्र होने तक आपको खाते में पैसे जमा करने पड़ते है और 21 साल की उम्र  हो जाने पर खाते की maturity हो जाती है।
5. परन्तु बेटी की 18 वर्ष की उम्र होने के बाद उसकी higher education या शादी के लिये आप आधा पैसा निकाल सकते है।
6.  21 साल की उम्र पूरी होने पर पूरा पैसा मिल जाता है।
7. आपको इस योजना में जमा किये गए रुपयो पर income tax की 80 C अनुसार छूट मिलती है।
8. इस योजना की सबसे बड़ी खासियत है इसकी ब्याज दर।इस योजना के तहत आपको काफी ज्यादा दर पर ब्याज मिलता है।
9. Sukanya Samriddhi Yojana के लिए आपको एक वर्ष में न्यूनतम 1000 Rs. जमा करवाने होते है। आप इससे अधिकतम 150000 रु जमा करवा सकते है
Sukanya Samriddhi Yojana के लिए योग्यता -
इस स्कीम के लिए सिर्फ बेटियां के खाते ही खुल सकते है
साथ ही इसके अंतर्गत वही आवेदन कर सकते है जो हमारे देश की नागिरक हो और उस बेटी की उम्र 10 साल या उससे कम हो ।
इस योजना के तहत जिस भी बच्ची का एकाउंट ओपन किया गया है उस बेटी के माता पिता एवं gardian इस खाते की देखरेख करती है। इस खाते में transaction भी वही करते है।
how to apply for sukanya samriddhi account (Sukanya Samriddhi Yojana In Hindi) -
इस योजना के लिए आप बैंक या पोस्ट आफिस में आवेदन कर सकते है। हमारे देश मे बैंक आज भी छोटे गाँवो तक अभी भी नही पहुची है। तो इस वजह स गवर्नमेंट में इस योजना के लिए बैंक और पोस्ट आफिस दोनो इस योजना के लिए चुने गए है। आप इस योजना के लिए आवेदन कर सकते है।
इस योजना के लिए अपनी बेटी का खाता बैंक या पोस्ट आफिस में खुलवा सकते है।
पहले आप अपनी नजदीकी बैंक या पोस्ट ओफिस में जाइए।
वहाँ आपको इस योजना के लिए एक फॉर्म दिया जाएगा जिसमे आपको अपनी details भरनी है। वह फॉर्म वहां जमा करवाना होगा। इसके साथ आपको कुछ डॉक्यूमेंट भी जमा करवाने होंगे।
डाक्यूमेंट्स और फॉर्म की details वेरीफाई होने के बाद खाता खोल दिया जाएगा
इसके बाद आपको वहां पैसे जमा करवाने होंगे। आपका खाता ओपन हो गया है।
Documents required for sukanya samriddhi account -
1) आपकी बेटी का जन्म प्रमाणपत्र
2) Depositor का पहचान पत्र
– पैन कार्ड,
–  पासपोर्ट,
– राशन कार्ड,
– ड्राइविंग लाइसेंस,
3) Depositor के पते का प्रमाण
– पैन कार्ड,
– राशन कार्ड,
– बिजली का बिल,
– टेलीफोन बिल
Sukanya Samriddhi Yojana Interest Rate-
जब इस योजना को लांच किया था तब इस योजना के अंतर्गत 9.1% 2015-16 में मिलता था। अब इस योजना के तहत 8.61% ब्याज दर दिया जाता है।
Sukanya Samriddhi Yojana Interest calculator -
इस  योजना के तहत interest वार्षिक रूप में कंपाउंड  जोड़ा जाता है उदहारण के लिए शीट दे रहे है जिसमे बच्चे की खाता खोलने की उम्र 5 वर्ष और मासिक जमा राशि 1000 रू मानी गयी है 

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क्या आप अपने क्षेत्र की समस्याओ का निवारण चाहते है तो जरूर पढ़े।

अगर आप युवा है और आप अपने क्षेत्र की समस्यों का निवारण चाहते है तो ये आपके लिए है। हम अक्सर गली मोहल्लों और चौराहों  लोगो को देश और समाज की समस्याओं के लिये नेताओ और प्रसाशन को कोसते देखते है। मगर कभी परिवर्तन के लिये कोई प्रयास नही करते । क्योकि शायद सिर्फ बाते बनाना हमारे लिये आसान होता है। मगर देश मे युवाओ से सिर्फ बातो की आशा नही की जा सकती युवा इस देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते है। कभी कभी कुछ समस्यओं का समाधान इसलिये नही हो पाता के   वो उचित अधिकारी तक पहुँच ही नही पातीअगर सभी युवा मिलकर क्षेत्र की समस्याओ के समाधान के लिये कार्य करे तो क्षेत्र को विकास के पथ पर अग्रसर कर सकते है।
इसके लिये सरकार द्वारा कई ऑनलाइन पोर्टल बनाये गए है जहाँ पर आप अपने क्षेत्र की समस्या को सरकार और प्रसाशन तक पहुँचा सकते है। और अपने देश का सजग नागरिक होने का परिचय भी दे सकते है उनमें से ही एक तरीका है समाधान पोर्टल आज हम  उत्तराखंड सरकार के समाधान पोर्टल पर अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान का तरीका बताएगे।
 सबसे पहले उत्तराखंड के समाधान पोर्टल पर जाय।
 http://samadhan.uk.gov.in/home.aspx

उसके बाद  Register your grievance पर क्लिक करे। तो ये पेज खुलेगा 

प्राथमिक रजिस्ट्रेशन पेज पर अपना नाम, पता , मोबाइल नंबर, वोटर id या DL का नंबर लिखे । और अपना राज्य और जिला चुने। और submit कर दे। इसके बाद यह पेज खुलेगा 

और आपके मोबाइल पर एक कोड आएगा और जिसे इस  नया पेज  पर निर्धारित स्थान पर मोबाइल पर आया कोड लिखे और फिर शिकायत का विभाग चुने।
स्तर चुने - जिला,निदेशालय या शासन स्तर
अपना जिला एवम् तहसील चुने
फिर स्पष्ठ शब्दों में शिकायत लिखे।
तथा अगर कोई दस्तावेज या फ़ोटो हो तो उसे pdf फॉर्मेट में अपलोड करे।
Yes या no पर क्लिक करे और इमेज में दिया कोड टाइप करे और सबमिट करे।
इस पूरी प्रक्रिया को 2 मिनट में पूरा करे क्योकि कोड सिर्फ 2 मिनट के लिये वैलिड होगा।
समय बचाने  के लिये शिकायत को पहले टाइप कर रखे और निर्धारित बॉक्स में पेस्ट कर दे।
शिकायत का नंबर नोट करके रखे और स्टेटस चेक करते रहे।
अगर कार्यवाही जिला स्तर पर न हो तो फिर निदेशालय और फिर शासन स्तर पर जाये।
यह  उत्तराखंड राज्य से सम्बंधित है
अन्य राज्य सरकार से सम्बन्धित विभागों की समस्या के लिए कुछ पोर्टल निम्न है
उत्तराखंड के लोग http://samadhan.uk.gov.in/home.aspx पर जाये
उत्तरप्रदेश के लोग http://jansunwai.up.nic.in/ पर जाये
मधयप्रदेश के लोग  http://cmhelpline.mp.gov.in/Mpsamadhan/ जाये
दिल्ली के लोग  http://delhi.gov.in/wps/wcm/connect/pgc1/public+grievances+commission/home पर जाये
इसी प्रकार कई राज्यों के ऑनलाइन पोर्टल है जहा आप अपनी शिकायत कर सकते है।  साथ ही कई विभागों के भी अपने पोर्टल है जहा पर समस्या के समाधान के लिए जा सकते है.
यदि आपकी कोई समस्या केंद्र सरकार के किसी विभाग से संबंधित है तो केंद्र के विभागों के लिये
http://pgportal.gov.inपर समस्या डाले।
इन शिकायतों के ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्टर होने के कारण संबंधित अधिकारियों द्वारा  उसे नजरअंदाज करना आसान नही होता। क्योंकि इन पोर्टल पर निगरानी उच्च अधिकारियों तथा स्वयं मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा भी नज़र रखी जाती है। तो अगर आपकी शिकायत जायज है तो संबंधित विभाग द्वारा उसके समाधान की सम्भवना बहुत अधिक है।
तो अब आप देश के सजग नागरिक बन देश के प्रति अपने कर्तव्य का निर्वाह करे। और अपने क्षेत्र की समस्या के समाधान में
योगदान दे कर अपना फर्ज निभाये।
आओ मिलकर साथ चले राष्ट्रनिर्माण में अपना सहयोग दे।

कर्मचारी भविष्य निधि, EPF नियम


कर्मचारी भविष्य निधि संगठन सरकारी और गैरसरकारी दोनों कर्मचारियों के भविष्य को सुनिश्चित करने के उदेश्य से बना एक संगठन है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन की स्थापना 15 नवम्बर ,1951 को कारखानों और अन्य संस्थानों में कार्यरत संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए की गयी थी | कर्मचारी भविष्य निधि कार्यालय के पास उन सभी कार्यालयों और कारखानों को रजिस्टर करना पड़ता है जहाँ पर 20 से अधिक कर्मचारी काम करते हैं |  तथा आज के समय मे अगर आपका बेसिक 15000 से कम है तो EPF में शामिल होना अनिवार्य है। जब भी आप किसी  ऐसी संस्था में काम करते है जो EPFO के साथ पंजीकृत है | और आपकी तनख्वाह 15000 से कम है तब आपकी तनख्वाह का 12% काट कर epf में जमा किया जाता है, और साथ ही आपकी तनख्वाह का 12% जिस कंपनी या संस्था में आप काम करते हैं उनको  EPFO में जमा कराना पड़ता है | मगर यहाँ पर एक बात गौर करने वाली है की आपकी तनख्वाह से कटा हुआ 12% तो पूरा आपके EPF खाते में चला जाता है | लेकिन आपके कंपनी द्वारा 3.67% EPF में और 8.33% EPS (Employee Pension Scheme) में चला जाता है | और माना यदि आपकी बेसिक 10000 है तो आपकी कंपनी या नियोक्ता द्वारा 10000 का 8.33% यानि की 833 रु EPS में जमा किया जायेगा बाकी 367 रु EPF में चला जायेगा | यानी कुल 1200+367= 1567 EPF में और 833 EPS में जायेगा।
और  आप कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्य होते है अतः आप  कभी भी प्रोविडेंट फंड या पीएफ बैलेंस जान सकते हैं। इसके लिए आपको अपनी कंपनी या किसी अन्य व्यक्ति की जरुरत  नहीं , न ही कम्पनी  द्वारा साल के आखिर में पासबुक की कॉपी देने का इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। आप जब चाहे अपना पीएफ बैलेंस की जांच कर सकते हैं। इसके लिए कर्मचारी चाहें तो EPFO की वेबसाइट, ऐप, एसएमएस या मिस कॉल देकर अपना पीएफ का बैलेंस जान सकते हैं। एपफओ की वेबसाइट से अपना बेलेन्स जाने का तरीका बहुत आसान है 
सबसे पहले epfindia.gov.in वेबसाइट पर जाएं। 
इसके बाद 'For Employees' के अंदर 'Our Services' पर क्लिक करें।
इसके बाद 'Services' सेक्शन के अंदर 'Member Passbook'  पर क्लिक करें। इसके बाद पेज खुल जाएगा। इसके लिए आपके पास अपना UAN नम्बर होना आवश्यक है तथा वह एक्टिव होना चाहिए। पासबुक एक्सेस करने के लिए आप यह सुनिश्चित कर लें कि UAN नम्बर को आपके कम्पनी  द्वारा एक्टिवेट कर दिया गया हो। आपको यूएएन, EPFO  द्वारा दिया जाता है। लेकिन इसके वैरिफिकेशन और एक्टिवेशन की ज़िम्मेदारी कम्पनी  की होती है। अगर आपका यूएएन एक्टिव है तो ही वेबसाइट पर पासवर्ड डालकर अपने अकाउंट को एक्सेंस कर सकते है ।
 EPFO के एम-सेवा ऐप के ज़रिए पीएफ बैलेंस जांचने का तरीका
 कर्मचारी चाहें तो ईपीएफओ के ऐप से भी पासबुक या पीएफ बैलेंस की जांच कर सकते हैं। EFPO सब्सक्राइबर को सबसे पहले MEMBER पर क्लिक करना होगा। इसके बाद Balance/Passbook और फिर UAN नंबर और पासवर्ड पर। फिर बैलेंस आपके सामने होगा। 
वैसे तो इस पैसे का उदेश्य आपके भविष्य को सुरक्षित करना होता है और यह आपके सेवानिवृत होने के बाद के लिए होता है नौकरी करते समय ईपीएफ का पैसा निकलने की इजाजत नहीं होती,परन्तु कुछ खास जरूरतों के लिए EPF की रकम निकाल सकते हैं  लेकिन ऐसे  खास मौके पर भी  ईपीएफ की कुछ राशि ही निकाली जा सकती है,  इसके तहत आप पूरी राशि नहीं निकाल सकते।  आप कब पैसा निकाल सकते है 
(i) अपने या परिवार (पति/पत्नी, बच्चे या डिपेंडेंट पेरेंट्स) के इलाज के लिए अधिकतम सैलेरी की 6 गुना रकम निकाली जा सकती है। मेडिकल इलाज में सर्जरी, टीबी, कोढ़, पैरालिसिस, कैंसर, और हैल्थ सम्बंधित बीमारियाँ शामिल हैं। 
(ii) अपनी, बच्चों की या भाई-बहन की शादी या एजुकेशन के लिए आपकी पूरी रकम का 50 % तक निकाला जा सकता है। ऐसा आप अपनी नौकरी के दौरान तीन बार कर सकते हैं।
(iii) ‘हाउस लोन’ को चुकाने के लिए सैलेरी का 36 गुना तक रकम निकालने की इजाजत होती है।
(iv) अपने पति या पत्नी या सामूहिक जिम्मेदारी पर लिए गए घर की मरम्मत के लिए सैलेरी की 12 गुना तक रकम निकाली जा सकती है। इस सुविधा का प्रयोग केवल एक बार किया जा सकता है |
(v) अपने लिए, स्पाउस के लिए या दोनों के लिए जॉइंटली प्लॉट या घर खरीदने या बनाने के लिए सैलेरी की 36 गुना तक रकम निकाली जा सकती है। प्लॉट खरीदने के लिए यह लिमिट 24 गुना तक है।
 EPFO के तहत आप पेंशन के भी हक़दार होते है कर्मचारी की सैलरी से हर महीने जो रकम काटी जाती है उसका मुख्य उद्देश्य  आपको सेवानिवृत  होने के बाद वित्तीय रूप से सक्षम रखना ही है | हालांकि पेंशन पाने के लिए निम्न शर्तों को मानना जरूरी है |
(i) पेंशन 58 वर्ष की आयु के बाद ही मिलती है।
(ii) पेंशन केवल तब ही मिल सकती है जब आपने नौकरी के 10 साल पूरे किए हों। अगर आपने नौकरी बदली है तो उस स्थिति में आपका ईपीएफ अकांउट ट्रांसफर किया गया हो।
(iii) न्यूनतम पेंशन 1000 रूपए प्रति माह, जबकि अधिकतम 3250 रूपए प्रति माह दी जाती है।
(iv) यह पेंशन ईपीएफ खाता धारक को आजीवन और उसके मरने के बाद उसके परिवार को दी जाती है।
लेकिन सबसे बड़ी समस्या होती है के इसके लिए आपको अपने नियोक्ता के चक्कर लगाने पड़ते थे परन्तु अब  ऐसा नहीं है सरकार ने कर्मचारियों को सुविधा देने के लिए PF निकालना आसान कर दिया है।  अब आप इसे ऑनलाइन क्लेम कर सकते है। इसके लिए ईपीएफओ की वेबसाइट www.epfindia.gov.in पर जाएं। यहां होम पेज पर ‘ऑनलाइन क्लेम’ के विकल्प पर क्लिक करें। यहां अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (यूएएन) और पासवर्ड फीड करें। इसके बाद आगे की प्रक्रिया अपनाएं। 
इसके अलावा उमंग एप डाउनलोड करें। इस एप के माध्यम से भी आप ऑनलाइन क्लेम कर सकते हैं। आप पीएफ निकालने की पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन पूरा कर सकते हैं। इसके लिए एम्पलॉयर और ईपीएफओ के ऑफिस में जाने की जरूरत नहीं होगी। पीएफ की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी होने के बाद पैसा अपने आप बैंक खाते में आ जाएगा। पीएफ धारक को पीएफ का पैसा निकालने के लिए कोई भी पेपर लगाने की जरूरत नहीं होगी। जिन पीएफ धारकों ने यूएएन को एक्टिवेट करके अपने आधार कार्ड के साथ लिंक कर रखा है तथा जिनका pan नम्बर भी उपडेट है, वह पीएफ ऑनलाइन निकालने के लिए आवेदन कर सकते हैं। पीएफ का पूरा सेटलमेंट करने के लिए फॉर्म19 सिलेक्ट करना होगा, वहीं पीएफ का कुछ हिस्सा निकालने के  लिए फॉर्म 31 सिलेक्ट करना होगा। इसके बाद फॉर्म में दी गई जरूरी डिटेल्स को डालकर फॉर्म को सबमिट करना होगा।पीएफ की प्रक्रिया ऑनलाइन पूरी होने के बाद पैसा अपने आप बैंक खाते में आ जाएगा। 
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