राष्ट्रनिर्माण में युवाओ के योगदान की जरुरत

युवा किसी भी देश का भविष्य है। भारत एक ऐसा देश है जहाँ 65 % आबादी 35 वर्ष से कम है। तो आप समझ सकते है कि इस देश के लिये युवाओं का सही द...

The heroes of pokhran

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13 मई 1998 ये इतिहास के पन्नो में दर्ज वो तारीख है जिसने भारत को परमाणु शक्ति संम्पन देशों की कतार में ला कर खड़ा कर दिया। 90 के दशक में जब न्यूक्लियर अमेरिका , रूस और चीन जैसे परमाणु शक्ति सम्पन्न देशों को दुनिया पर दबदबा था तो देश के तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देश को परमाणु शक्ति सम्पन्न बनाने की ठानी और तैयार हुआ एक खुफिया ऑपरेशन जिसे नाम दिया गया शक्ति और इसको सफल बनाने का जिम्मा था DRDO के चीफ dr A P J अब्दुल कलाम का। 
उस समय की सरकार जानती थी के इस परीक्षण को करना और इसके बाद कि स्तिथि बहुत मुस्किलो से भरी होगी मगर जब मामला देश हित का हो तो हर मुश्किल से लड़ने के लिये तैयार रहना पड़ता है। 
मगर अपनी सूझबूझ से पोखरण की टीम ने अपने इस अभियान की भनक किसी को नही लगने दी यह तक कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA को भी इसकी जरा भी खबर न लग पायी। यहाँ तक कि इस परीक्षण के बाद अमेरिकी सीनेटर रिचर्ड शेल्बे ने भी अपने एक इंटरव्यू में मन था कि ये CIA की बहुत बड़ी विफलता थी कि वो इस परीक्षण की कोई जानकारी नही जुटा पायी।
और यही थी हमारे पोखरण के हीरो की सफलता जो इस मुश्किल अभियान को सफल बनाया।

आखिर कैसे भारतीय सेना, सरकार और DRDO के अधिकारियों ने दुनिया से इस अभियान को बचाया कैसे इतनी शक्तिशाली स्टेलिट्स से बचकर इस अभियान को सफल बनाया वो कहानी भी दिलचस्प है।
सैटेलाइट से बचने के लिये सारे काम रात को किये जाते और सुबह सब चीजों को वैसा ही कर दिया जाता जैसे वो पहले थे और कही रेत भी हटाई जाती तो उसे हवा के दिशा में ऐसे रखा जाता ताकि वो सब प्राकतिक लगे। जब अगले दिन खुफिया एजेंसियां सेटेलाइट की तस्वीर देखती तो उन्हें सब सामान्य दिखता।
यहाँ तक कि कम्युनिकेसन में भी सावधानी बरती जाती शाफ़्ट के नाम भी व्हीट हाउस, विस्की या ताजमहल आदि रखे गए।
DRDO और BARC के वैज्ञनिक भी जब साइट पर जाते तो वो आर्मी की वर्दी में जाते और उनके नाम भी बदले गए थे अब्दुल कलाम जी को मेजर जनरल पृथ्वी राज नाम दिया गया था।
अभियान की गोपनीयता को बनाये रखने के लिये और किसी जानकारी को लीक होने से बचाने के लिये अपने अधिकारियो को भी अंधेरे में रखा गया था यहाँ तक कि कलाम जी वाजपेयी जी और राजगोपालाचारी जी की न्यूक्लीय वपेन टेस्ट के संबंधित मीटिंग की जानकारी तत्कलीन रक्षामंत्री से भी छुपाई गयी।
यहाँ तक कि कहा जाता है कि CIA को भी इसकी जानकारी अटल बिहारी वाजपेयी जी के टेलिविजन पर घोषणा के बाद ही पता चली।
तो ऐसे थे हमारे पोखरण के हीरो।जिन्होंए राष्ट्र को शक्ति सम्पन्न बनाने के लिये इस खुफिया मिशन को अंजाम दिया।
यहाँ एक बात साफ करना जरूरी है कि न्यूक्लियर परीक्षण का मतलब सिर्फ परमाणु हथियार बनाना नही होता ये आत्मा रक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों के लिये भी जरूरी है। ताकि हमारे विकास को गति मिल सके। और भारत का तो इतिहास भी रहा है के हमने कभी किसी देश पर आक्रमण नही किया । हिंदुस्तान हमेशा से विश्व शांति के लिये ही काम कर रहा है।

Ankush chauhan blog

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